इतने में प्रधानमंत्री ने सीएमडी से पूछ लिया, ‘आपने दिल्ली के मुख्यमंत्री को नहीं बुलाया है?’

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साल 2000 की गर्मियां, तारीख याद नहीं आ रही। गूगल महाराज भी इस बारे में सहयोग नहीं कर रहे। बिजली का ग्रिड संभालने वाले पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के उत्तर क्षेत्र के मुख्यालय में नई शुरुआत होने जा रही थी। इस शुरुआत के मद्देनज़र जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय को दिल्ली के अरबिंदो मार्ग से जोड़ने वाले शहीद जीत सिंह मार्ग पर यातायात रोक दिया गया था।

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ग्रिड के कंप्यूटरीकृत कंट्रोल तकनीक का उद्घाटन करने आ रहे थे। कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया स्थित पावर ग्रिड के उतर भारत के मुख्यालय को इसके लिए जमकर सजाया गया था। करीब साढ़े नौ बजे सुबह का वक्त होगा, पत्रकारों का हुजूम इस घटना को कवर करने के लिए आ चुका था।

प्रधानमंत्री की अगवानी के लिए तत्कालीन ऊर्जा मंत्री सुरेश प्रभु आ चुके थे और पावर ग्रिड के सीएमडी के साथ तैयार खड़े थे। इतने में हूटर बजना शुरू हुआ। संकेत स्पष्ट था कि प्रधानमंत्री आ चुके हैं। 

ग्रिड को संभालने वाले कंप्यूटर आधारित तकनीक का कंट्रोल रूम में प्रधानमंत्री जब घुसे तो लपक कर ऊर्जा मंत्री ने उनका स्वागत किया। फिर सुरेश प्रभु ने अफसरों से परिचय कराना शुरू किया। जाहिर है कि पावर ग्रिड के सीएमडी का नंबर पहला था। इतने में प्रधानमंत्री ने सीएमडी से पूछ लिया, ‘आपने दिल्ली के मुख्यमंत्री को नहीं बुलाया है?’

पीएम का सवाल सुुुन सब हकलाने लगे
प्रधानमंत्री का सवाल सुन सीएमडी हकलाने लगे, ‘स्सर…स्सर…हमने उन्हें भी बुलाया है।’ ‘फिर वे क्यों नहीं आईं ?’ उन दिनों शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं। जाहिर है कि वाजपेयी उनके ही बारे में पूछ रहे थे। पत्रकारों के लिए प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में दिल्ली के मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति बड़ी खबर होने जा रही थी। सबकी निगाहें प्रधानमंत्री और कान उनके शब्दों पर केंद्रित हो गए।

इतने में कमरे में हांफती-सी परेशान शीला दीक्षित आती दिखीं। प्रधानमंत्री को देख उन्होंने पहले प्रणाम किया। वाजपेयी ने किंचित व्यंग्य के मूड में उनका स्वागत किया, ‘आइए….आइए..शीला जी..प्रधानमंत्री पहले पहुंच जाता है और दिल्ली का मुख्यमंत्री देर से आता है..’

कुछ देर के अपने चिरपरिचित विराम के बाद वाजपेयी ने मुस्कुराते हुए कहा,’प्रधानमंत्री, दिल्ली के मुख्यमंत्री का स्वागत कर रहा है।’ शीला संभ्रांत महिला थीं। वाजपेयी की अदा से वे शर्मिंदा नज़र आ रही थीं। ‘ट्रैफिक जाम में फंस गई थीं..’ शीला दीक्षित ने देर से आने के लिए जैसे सफाई दी। ‘आप भी जाम में फंस जाती हैं?’ वाजपेयी ने चुटकी ली। ‘थोड़ी देर गई, जब आ रही थी, तब आपके कैरेवान के लिए ट्रैफिक रोक दिया गया था..उसी में हमारी गाड़ी भी थी।’ शीला की झेंप तब तक नहीं मिट पाई थी।

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