इस तरह से मेडिकल लाइन में बीजेपी नेताओं के बच्चों को पास किया जा रहा है.

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इस मामले में यूनिवर्सिटी के रजिष्ट्रार डॉ. डीएम पटेल ने कहा कि जांच में पता चला कि कॉपियों की जांच के दौरान दिए गए नंबरों की लिखावट में अंतर है. स्पष्ट रूप से समझें, तो सभी छात्रों की कॉपियों को देखा गया, उसमें पाया गया कि नंबर लिखने का तरीका तीन छात्रों की कॉपियों में एक जैसा, वहीं अन्य छात्रों की कॉपियों में अलग था. इससे स्पष्ट होता है कि पूरी आंसरशीट ही बदली गई है.

वहीं आज इस मामले की रिपोर्ट आने के बाद यूनिवर्सिटी का माहौल भी गर्म दिखाई दिया. बताया गया है कि जिन छात्रों की आंसरशीट को बदला गया है कि वो सभी बीजेपी नेताओं के बच्चे हैं. अभी तक एक छात्र पार्थ माहेश्वरी का नाम सामने आया है. पार्थ की मां पालनपुर नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष हैं, जो फिलहाल वार्ड नंबर एक से सदस्य भी हैं. वहीं अन्य छात्र भी बीजेपी नेताओं से जुड़े हुए हैं.

वहीं इस मामले में कांग्रेस विधायक किरीट पटेल ने कहा कि इस तरह से मेडिकल लाइन में बीजेपी नेताओं के बच्चों को पास किया जा रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि ये सभी कैसे डॉक्टर बनेंगे. वहीं इस पूरे मामले की सच्चाई बाहर आने के बाद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. जेजे वोर गायब हैं. इस पूरी घटना में उनकी भूमिका पर भी बड़ा सवाल उठता है. क्योंकि जब 2018 में इन छात्रों को पास किया गया, तो वे केमिस्ट्री विभाग के डीन थे और उन्ही के साइन से ये तीनों छात्र पास किए गए. शिक्षा​मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

गुजरात की हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी में नेताओं के फेल बच्चों को पास करने का मामला सामने आया है. ये पूरी कहानी 2018 में हुई एमबीबीएस परीक्षा की है. इस परीक्षा में तीन छात्रों की पूरी आंसरशीट को ही बदल दिया गया. ये खेल महज इन फेल छात्रों को पास करने के लिए किया गया. इस पूरे मामले में जब जांच हुई, तब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ.

गुजरात के पाटन की हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी में MBBS एग्जाम देने वाले छात्र फेल तो हुए, लेकिन फेल होने के बाद जब रिएसेसमेंट किया गया तो तीन छात्रों को अच्छे नंबर से पास कर दिया गया. वर्ष 2018 में हुए इस रिएसेसमेंट को लेकर कुछ छात्र संगठन को शक हुआ, जिसके बाद इस पूरे मामले में जांच मांगी गई. यूनिवर्सिटी की ओर से एक जांच कमेटी बना दी गई, लेकिन आज जब इस कमेटी की रिपोर्ट आई, तो हर किसी के पैरों तले जमीन खिसक गयी.

कमेटी ने माना की रिएसेसमेंट के दौरान पूरी की पूरी आंसरशीट ही बदल दी गई.

इस मामले में यूनिवर्सिटी के रजिष्ट्रार डॉ. डीएम पटेल ने कहा कि जांच में पता चला कि कॉपियों की जांच के दौरान दिए गए नंबरों की लिखावट में अंतर है. स्पष्ट रूप से समझें, तो सभी छात्रों की कॉपियों को देखा गया, उसमें पाया गया कि नंबर लिखने का तरीका तीन छात्रों की कॉपियों में एक जैसा, वहीं अन्य छात्रों की कॉपियों में अलग था. इससे स्पष्ट होता है कि पूरी आंसरशीट ही बदली गई है.

वहीं आज इस मामले की रिपोर्ट आने के बाद यूनिवर्सिटी का माहौल भी गर्म दिखाई दिया. बताया गया है कि जिन छात्रों की आंसरशीट को बदला गया है कि वो सभी बीजेपी नेताओं के बच्चे हैं. अभी तक एक छात्र पार्थ माहेश्वरी का नाम सामने आया है. पार्थ की मां पालनपुर नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष हैं, जो फिलहाल वार्ड नंबर एक से सदस्य भी हैं. वहीं अन्य छात्र भी बीजेपी नेताओं से जुड़े हुए हैं.

वहीं इस मामले में कांग्रेस विधायक किरीट पटेल ने कहा कि इस तरह से मेडिकल लाइन में बीजेपी नेताओं के बच्चों को पास किया जा रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि ये सभी कैसे डॉक्टर बनेंगे. वहीं इस पूरे मामले की सच्चाई बाहर आने के बाद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. जेजे वोर गायब हैं. इस पूरी घटना में उनकी भूमिका पर भी बड़ा सवाल उठता है. क्योंकि जब 2018 में इन छात्रों को पास किया गया, तो वे केमिस्ट्री विभाग के डीन थे और उन्ही के साइन से ये तीनों छात्र पास किए गए. शिक्षा​मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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