प्रधानमंत्री द्वारा परिक्षा पर चर्चा और हमारी जिम्मेदारी

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प्रधानमंत्री द्वारा परिक्षा पर चर्चा और हमारी जिम्मेदारी ।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी प्रति वर्ष बच्चों के मार्गदर्शन के लिए बहुत सारे टिप्स देते हैं ।काश छात्र छात्राएं उन टिप्स पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए तैयारियां आरम्भ करें तो बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं । इसके साथ ही अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में ये टिप्स अत्यन्त लाभकारी सिद्ध होते हैं ।
आज हम बात करते हैं परिक्षा से सम्बन्धित उन बिन्दुओं पर जहां पेपर हाथ में आते ही परिक्षार्थियों के हाथ-पांव फूल जाते हैं और सभी कुछ याद किया हुआ गायब हो जाता है ।
कहा जाता है कि
हिम्मत की तराजू में हमेशा खुद को तुम तौलना ।
वक्त पड़े तो सोच समझकर ही हमेशा तुम बोलना ।।
धैर्य संयम और आत्म विश्वास को हर पल साथी बनाना ।
परिक्षा की तैयारी में कभी खुद को ही न भूल जाना ।।
हां इसमें कोई दो राय नहीं परिक्षाओं की तैयारी में बच्चे अक्सर खाना पीना तक भूल जाते हैं । जिससे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है ।दूसरे शब्दों में कहा जाये तो बच्चे किताबी कीड़ा बनने की कोशिश करते हैं । लेकिन सबसे अधिक सोचने वाली बात यह है कि हम किताब को पढ़ने की कोशिश जरूर करें । कहीं ऐसा न हो जाये किताब उल्टा हमें ही पढ़ने लगे । इसके लिए हमें धैर्य पूर्वक तैयारियां करनी चाहिए ।मसलन जैसे –
1- पढ़ाई का समय नियत करें ।ऐसा नहीं हर समय किताबों के पीछे ही पड़े रहें । पता चला परिक्षा काल में घंटा बजते ही सब धरा का धरा रह जाये ।
शाम को रात्रि दस बजे तक पढ़ाई करें ।खाना शाम सात बजे के आसपास खाकर थोड़ा बहुत टहलें । उसके बाद रात्रि आठ बजे से दस बजे तक किसी एकान्त कमरे में परिक्षाओं की तैयारी करें ।
2- सुबह चार बजे उठकर पहले पानी पिएं उसके बाद चाय आदि फिर शौच आदि जायें ।आधा घंटा योग प्राणायाम करें ।
उसके बाद पढ़ने के लिए बैठें ।सुबह सात बजे तक आप आराम से तैयारी कर सकते हैं ।
जिस विषय की आप तैयारी कर रहे हैं केवल उसी विषय वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करे ।
अक्सर हमारे मन में अनेकों विचार हर समय उठते रहते हैं । और हमारी परिक्षा तैयारी में भी बाधक बनते हैं ‌ऐसी परिस्थितियों में ध्यान मग्न होकर तैयारी करें ध्यान को भटकने न दें ।
ध्यान योग का निरंतर अभ्यास करें ‌आखें बन्द कर सुखासन में बैठकर अपना ध्यान नासिका के दोनों छिद्रों पर केंद्रित करें । और धैर्य पूर्वक सांस के आवागमन को देखने का प्रयास करें ‌। इससे आपकी मानसिक क्षमता बढ़ जायेगी । और भूलने की बिमारी वालों को विशेष रूप से यह प्रयोग करना चाहिए ‌।
3- प्रत्येक छात्र कुछ जीव जंतुओं की जीवनशैली से बहुत कुछ सीख सकता है । जैसे कौआ, बगुला,तोता, कुत्ता,आदि जिन पर विशेष ध्यान केंद्रित करना चाहिए ।
4-छात्र जीवन के कुछ सिद्धांतों का हमेशा पालन करना चाहिए जैसे ।
काक चेष्टा बको ध्यानम स्वान निद्रा तथैव च अल्पाहारी गृह त्यागी विद्यार्थी पंच लक्षण:।
5- कौआ बहुत ही चालाक पक्षी होता है । जब तक किसी वस्तु को प्राप्त नहीं कर लेता उस स्थान पर मंडराता रहता है । वस्तु प्राप्त होते ही उड़ जाता है । ठीक उसी प्रकार प्रत्येक छात्र कोए को गुरु मान कर परिक्षा की तैयारी करे तो उसके लिए काफी लाभदायक सिद्ध हो सकता है ।
6- कहा जाता है कि बगुला भगत आज की दुनिया में क़दम क़दम पर बगुला भगत मिल जायेंगे । लेकिन बगुले की मानसिकता तो होगी मगर विशेषता नहीं ।कभी गौर से देखने का प्रयास करें किसी नदी के किनारे पर एक बगुला आंखें बन्द किए हुए खड़ा हैं । जैसे ही शिकार नजदीक आया उसका भोजन बन गया । ठीक परिक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए भी यह उपयोगी तरीका हो सकता है ।जिस प्रश्न का समाधान आसानी से न मिल रहा हो । थोड़ी देर आंखें बन्द कीजिए । और प्रश्न के उत्तर पर ध्यान केंद्रित कीजिए ।उसका उत्तर हो सकता है थोड़ी देर में आपके सामने हो । लेकिन यह पढ़ने वाले छात्रों के लिए है । पढ़ाई से जी चुराने वाले छात्रों के लिए नहीं ।वे कितना ही आंखें बन्द करके देख लें कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है ।
7-कुत्ता जो कि एक प्रकार से स्वामी भक्ति की पहचान को प्रदर्शित करता है ।इसी के साथ कम नींद भी कुत्ते की पहचान को प्रदर्शित करतीं हैं । हल्की सी आहट पर कुत्ता सतर्क हो जाता है ।वही बात परिक्षार्थियों में होनी चाहिए । यानि परिक्षार्थियों को समय का पाबंद होना चाहिए। हल्की सी आहट पर सुस्ती छोड़कर अपनी तैयारी में लग जाना चाहिए ।
8- कम खाना गम खाना अर्थात अल्पाहार विशेष रूप से किसी भी परिक्षा की तैयारी कर रहे परिक्षार्थियों को अल्पाहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए ।तली भुनी चीजों का परहेज रखना चाहिए । ऐसी परिस्थितियों में हल्का फुल्का भोजन और अधिक मात्रा में साग सब्जियां व सलाद व फलों आदि का सेवन लाभकारी होता है । गरिष्ट भोजन आलस्य पैदा करता है ।कम मात्रा में पौष्टिक भोजन बन ध्यान देना चाहिए ।
9- ग्रह त्यागी पहले शिक्षा की प्राप्ति के लिए वनों अर्थात आप के परिप्रेक्ष्य में हास्टल में बच्चों को पढ़ने के लिए भेजा जाता था ।उसका अभिप्राय था बच्चा माता-पिता से अलग रहकर शिक्षा की प्राप्ति करे ।उसका पूरा ध्यान शिक्षा पर केंद्रित हो । वहीं प्रथा आज हास्टल पद्धति में बदल गई है । लेकिन आज कहा जाता है कि अक्सर हास्टल में रहने वाले बच्चे अक्सर बिगड़ जाते हैं । उसमें सबसे बड़ी कमी स्कूल मैनेजमेंट की होती है ।जिन हास्टलों में शिक्षा की गुणवत्ता का ध्यान न रखकर मात्र धन प्राप्ति होता है । उच्छृंखल प्रवृत्ति के छात्र छात्राओं के संसर्ग में शिक्षार्थियों का मानसिक विकास अवरूद्ध हो सकता है । ऐसी परिस्थितियों में सरकार को भी ऐसे निजी हास्टलों को विशेष निगरानी सूची में रखना चाहिए ।
लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि एकान्त सेवन ही पढ़ाई लिखाई के लिए सबसे सर्वोत्तम स्थान होता है । भीड़भाड़ या शोर शराबे में कभी भी किसी भी परिस्थिति में सही रूप से पढ़ाई नहीं हो सकती । ऐसे में प्रत्येक छात्र छात्राओं से किसी एकान्त स्थान पढ़ाई के लिए सुनिश्चित कर लेना चाहिए ।
इसी के साथ अपनी मानसिक विचार धारा को केवल शिक्षा तक ही सीमित रखना चाहिए ।
आई ए एस ,पी सी एस ,आई पी एस,आई एफ एस, जितनी भी यूपीएससी की परिक्षाएं होती है । उनके छात्र छात्राओं का जीवन एक प्रकार से हमें थोड़ा अलग-अलग सा प्रतीत होता है ।उसका मुख्य कारण यही है । जितनी हम गहन शोध अध्ययन में उतरते चलें जाते हैं ।उतने ही हम समाज से विलग होते चले हैं ।
लेकिन जब व्यवहारिक धरातल अर्थात वास्तविक जीवन शैली अपना कर कार्य क्षेत्र में आते हैं । तो उनके जीवन से शिक्षा प्राप्त कर अनेकों शिक्षार्थी अपना भविष्य संवार लेते हैं ।
जीवन की कटु सच्चाई है जितना भागोगे उतना मिलेगा ।
जैसा कर्म तुम्हारा होगा उतना ही तुम पर बादल बरसेगा ।।
याद करो कभी अपनी कहानी और यादों की तस्वीर बनाओ ।
जीवन में कुछ बनना है तो शिक्षा की पग-पग पर अलख जगाओ ।‌।
जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम

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