तालिबान के नाम पर भारत में हिंदू-मुस्ल‍िम सियासत.

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लखनऊ : अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हिंदुस्तान में ध्रुविकरण का जरिया बन रहा है. देश में वहाबी मुसलमानों के एक तबके ने तालिबान की हिमायत शुरू कर दी है. तो यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने ऐसे लोगों को बेनकाब करने को कहा है. यूपी बीजेपी के आईटी सेल के हेड ने ट्वीट किया है कि योगी जी तालिबान की बर्बरता की की वजह से देवबंर की यूनिट खोल रहे हैं. अफगानिस्तान की हकीकत से बेखबर लोग सोशल मीडिया पर तालिबान के पक्ष-विपक्ष में सांप्रदायिक बहस कर सकते हैं. इसे सामाजिकम ध्रुविकरण का खतरा बढ़ा है.

काबुल एयरपोर्ट पर तालिबान और उसकी तालिबान शरियर के कानून से खौफजदा आम अफगानी मुसलमान कई दिन तक मुल्क छोड़कर भागने की जद्दोजहद करते रहे. क्या खौफ होगा तालिबान का कि किसी भी कीमत पर वहां से भागने के लिए कुछ जहाज के डैनों तो कुछ पहियों से चिपक गए. और आसमान से गिर के चीथड़ों में बदल गए. हिंदुस्तान में तालिबान के हिमायती मौलाना इन खौफजदा लोगों को अमेरिकी एजेंट बताते हैं.

मुस्ल‍िम धर्मगुरु मौलाना मसूद मदनी कहते हैं, ‘वो अमेरिका के लोग थे जो अमेरिका के साथ भागने को तैयार थे. उनको अमेरिका रोटियां ख‍िला रहा था और माल दे रहा था, डॉलर दे रहा था. वो चूंकि डरे हुए हैं हालांकि उनको भी माफ कर दिया है अफगान तालिबान ने.’

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वहाबी सोच के तमाम मौलाना हजारों बेगुनाह मुसलमानों के कातिल तालिबान की हिमायत में उतरे हैं. कह रहे हैं कि अब उनका हृदय परिवर्तन हो गया है. कुछ तो उनकी तुलना पैगंबर मोहम्मद से कर रहे हैं.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना सज्जाद नोमानी ने तो तालिबान के खूनी इतिहास को भुला कर उन्हें एक तरह से अहिंसा का पुजारी बताया और उनके अफगानिस्तान पर कब्जा करने पर उनको हिंदुस्तान से सलाम भेजा है.

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